मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी सूरदास - कविता कोश मुझे दूध पीते कितनी देर हो गयी पर यह तो अब भी छोटी ही है । तू जो यह कहती है कि दाऊ भैया की चोटी के समान यह भी लम्बी और मोटी हो जायगी और
मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी - पद | हिन्दवी मुझे दूध पीते कितना समय हो गया है, पर यह तो अब भी छोटी ही है। तू जो यह कहती है कि दाऊ भैया की चोटी के समान यह भी लंबी और मोटी हो जाएगी और
सूरदास मैया कबहि बढ़ैगी चोटी कविता सूरदास मैया कबहि बढ़ैगी चोटी? किती बेर मोहि दूध पियत भइ, यह अजहूँ है छोटी। तू जो कहति बल की बेनी ज्यौं, ह्वै है लाँबी मोटी।
मैया कबहिं बढ़ैगी चोटी― सूरदास व्याख्या― बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से शिकायत करते हुए कहते हैं कि, माँ मेरी छोटी अभी भी छोटी है। यह कब बड़ी होगी। मुझे लगातार दूध
मैया कबहिं बढ़ैगी चोटी― सूरदास व्याख्या― बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से शिकायत करते हुए कहते हैं कि, माँ मेरी छोटी अभी भी छोटी है। यह कब बड़ी होगी। मुझे लगातार दूध
सूरदास के पद : अध्याय 11 » StudyBath Ans श्रीकृष्ण, बलराम जी की तरह अपनी चोटी चाहते थे परन्तु उनकी चोटी छोटी है। माता यशोदा इसी बात का ताभ उठाकर श्रीकृष्ण को प्रलोभन देते